Saturday, June 30, 2012


Life giving almighty have given everyone equal life. I am saying equal life because probably we have considered breathing as life .Because when activity of breathing stops; we consider it as death…isn’t it? And if it is like this then what is the need for god to give us human body because breathing, filling your stomach, giving birth to child and dying in the end, all these actions are done by animals also….and if there is no specialty in us then what is the difference between us and animals….Just that we have been given tongue by god to speak out. We can understand each other’s feelings then animal also understand each other’s language, understand felling of each other then the only basic difference between them and us is that we can use brain and intelligence then if we have the ability to understand , is it right that we live a poor life in spite of knowing everything……Are we not wrong that river is flowing at full flow near us and we are crying that we are thirsty…….In the similar manner , being the part of Sadgurudev Nikhil , if we still live the life of incompleteness, poverty and deficiencies then nobody will be more unfortunate than us and secondly it is also said that “Money is not everything in life but it is very much important”
If you need prosperity then you have to eliminate poverty…but what is the point having money when you can acquire Lakshmi but you do not have competence to handle it? In other words, if your body is not disease-free then what is the meaning of having money? Such money does not solve any purpose if it can’t help us in enjoying worldly pleasures. Because frequently it is seen that if any rich man is caught up with any disease then doctor will advise him to take only simple roti-dal whereas he can afford costly to costliest food. And the poor person who can hardly afford two meals per day, when he is afflicted with disease, he is told to eat those things which are beyond the imagination of that helpless guy…..In other words, if we are suitable candidate in all the aspects then only our life will be complete.
Sadgurudev used to say that container (Paatra in Hindi) does not mean only any utensil; its hidden meaning is connected to our life.       If we are not right container then we will not be able to take anything from Guru because if our container is small is small then grain will fall outside…..therefore for becoming a good container (suitable candidate), it is very important to make our life Akshaya (which can’t be destroyed) because the one who is invincible can only know the art of becoming immortal. For accomplishing any sadhna, the basic mantra is that we consider our self as Shiva and Shakti and we learn ourselves to be mantra itself i.e. there is no difference between us and mantra……As concentration is required to hit target, make your inner consciousness so deep that you can feel the presence of Sadgurudev…..feel that divine smell/scent of his body which is amazing in itself….Every sadhna have some fixed rules whereby that sadhna can be accomplished…..Similarly for Akshaya Paatra sadhna..
1.   You should have one copper container which can have at least minimum 250ml water.
2.   Rice which you can pour in that container daily according to your ability after the mantra jap.
3.   Yellow dhoti or saree.
4.   Direction will be east or north.
5.   This is night-time sadhna.
6.   One red cloth.

This sadhna is of 11 days and on first day one has to chant 21 rounds. After that for the next 11 days 1 round every day and if you can do 21 rounds each day then very good. Place the container in front of Guru Picture and before starting sadhna do Guru Mantra as Guru Mantra works as a satellite between us and Sadgurudev. Take a nice bath before sitting for sadhna because cleanliness of body is very essential and during the sadhna days, eat pure food. Every night after sadhna, take some rice in hand and put them in container and last day after doing sadhna, wrap the container along with rice within red cloth and keep it in temple or safe (where you keep your valuable articles and money)
Actually, significance of any sadhna can be understood only when it is done by us. Just by praising it in words can’t make us understand its significance. Now choice is all yours.

जीवनदायनी कुदरत ने सब को एक समान जीवन दिया है|एक समान इसलिए कह रही हूँ क्योकि शायद सांस लेने को ही हम लोगो ने जीवन मान लिया है क्योकि सांस रुक जाने की प्रक्रिया को तो हम लोग मृत्यु मानते है ना....और यदि ऐसा ही है तो क्या पड़ी थी ईश्वर को हमे मानव देह देने कि क्योकि सांस लेना,पेट भरना,बच्चे पैदा करना और फिर अन्त में मर जाना ये सब क्रिया कलाप तो जानवर भी करते ही है....और यदि हम में कोई विलक्षणता नहीं तो हम में और जानवरों में फर्क भी क्या है....बस इतना कि हमें बोलने के लिए भगवान ने जुबां दी है, हम एक दूसरे की भावनाएं समझ सकते है तो जानवर भी एक दूसरे कि भाषा समझते है, एक दूसरे के भाव समझ लेते है तो उनमें और हम में मात्र एक ही आधारित भेद ये है कि हम विवेक से काम ले सकते है तो यदि हम में सोचने समझने कि क्षमता है तो क्या ये उचित है कि हम सब कुछ जानते बूझते हुए भी दरिद्रता वाला जीवन जियें...क्या ये हमारी गलती नहीं है कि कल-कल करती बहती नदी हमारे सामने बह रही है और फिर भी हम चीख-पुकार मचा रहे है कि हमे प्यास लगी है.....ठीक इसी तरह निखिल अंश होते हुए भी यदि हम अपूर्णता, दरिद्रता और आभावों से युक्त जीवन जीते  हैं तो हमसे बड़ा बदनसीब कोई नहीं हो सकता और दूसरी बात कहते है कि ," जीवन में पैसा सब कुछ नहीं होता मगर बहुत कुछ जरूर होता है" .
 यदि सम्पन्नता चाहिए तो दरिद्रता का नाश करना ही पड़ेगा....पर ऐसे धन का क्या लाभ जिसमें लक्ष्मी हमारा वरन तो कर ले पर उसे सम्भालने का सामर्थ्य हममें नहीं है??मतलब यदि देह रोग मुक्त नहीं है तो धन का क्या अभिप्राय रह जाता है|ऐसा धन किसी काम का नहीं जो हमें सांसरिक सुखो को भोगने के काम ना आ सके क्योकि अक्सर ऐसा होता है कि अगर किसी धनवान को कोई रोग हो जाए तो डाक्टर उसे सिर्फ दाल रोटी खाने को बोल देंगे जब कि वो कुछ भी और कितना भी महंगा भोजन खा सकता है और एक गरीब जिसको दो वक्त को रोटी के वभी वांदे होते है उसको कोई रोग होने पर ऐसी ऐसी चीज़े खाने को बता देंगे जो उस बेचारे की कल्पना के भी बाहर हो.....कहने का अभिप्राय ये है कि यदि आप हर तरह से सुपात्र हैं तो ही जीवन सपूर्ण हो पायेगा.
 सदगुरुदेव हमेशा कहते है कि पात्र का अर्थ मात्र बर्तन से नहीं है इसका गूढ़ अर्थ हमारे जीवन से जुड़ा है| अगर हम में सुपात्रता नहीं है तो हम अपने गुरु से कुछ भी नहीं ले पायेंगे क्योकि यदि हमारी ही अंजुरी छोटी है तो दाने तो बाहर गिरेंगे ही...इसीलिए अच्छे सुपात्र बनने के लिए जीवन को अक्षय बनाना अति आवश्यक है क्योकि जो अजय है वही तो अमर होंने कि कला सीख पायेगा ना| किसी भी साधना को सिद्ध करने का मूल मंत्र ये है कि खुद को ही शिव और शक्ति मान के आपने आप को मंत्र बनाना सीख लिया जाए अर्थात मंत्र और आप में कोई भेद ना रहे...जैसे लक्ष्य भेदन के लिए इकाग्र्ता जरूरी है ठीक वैसे ही आपनी अन्तश्चेतना को इतना गहरा कर लो कि सदगुरुदेव कि उपस्थिति महसूस कर सको...महसूस कर सको उनके शरीर की दिव्य गंध जो आपने आप में अद्वितीय है...क्योकि जिस दिन ये हो जाएगा उसी दिन आपका जीवन भी अक्षय पात्र बन जाएगा ... हर साधना के अपने कुछ निर्धारित नियम होते हैं जिनसे उस साधना को सिद्ध किया जा सकता है...वैसे ही अक्षय पात्र साधना के लिए...
 १- आपके पास एक तांबे का पात्र (बर्तन) होना चाहिए जिसमें कम से कम 250ml पानी आ सके.
 २- चावल जिसे आप आपनी क्षमता के हिसाब से रोज मंत्र जाप करने के बाद उस पात्र में दाल सको.
 ३- पीली धोती या साड़ी
  ४- आपकी दिशा पूरब या उत्तर होगी
  ५- ये रात कालीन साधना है
 ५- एक लाल कपड़ा
ये ११ दिनों की साधना है और पहले दिन इसकी २१ माला करनी होती है उसके बाद अगले ११ दिनों तक १-१ माला और यदि २१ माला हर दिन कर सको तो और अच्छा. गुरु चित्र के सामने पात्र को रख लो और साधना शुरू करने से पहले गुरु मंत्र करो क्योकि गुरु मंत्र हमारे और सदगुरुदेव के बीच सेटेलाइट का काम करता है. साधना में बैठने से पहले अच्छे से नहा लो क्योकि देह का शुद्ध होना बहुत जरूरी है और जितने दिन साधना चलेगी उतने दिन बिलकुल शुद्ध भोजन खाये. रोज रात को साधना के बाद थोड़े से चावल हाथ में लेकर उस पात्र में डाल दे और अंतिम दिन साधना सम्पन्न करने के बाद उस पात्र को चावल समेत लाल कपड़े में बाँध कर अपनी तिजोरी में या मंदिर में रख दें.
ओम ह्रीं श्रीं ह्रीं अक्षय पात्र सिद्धिम ह्रीं श्रीं ह्रीं ओम ||

वस्तुतः किसी भी साधना की महत्ता तभी समझी जा सकती है,जब उसे स्वयं प्रयोग का देखा जाये,मात्र शब्दों का महिमामंडन करने से तो प्रयोग को नहीं समझा जा सकता, अब मर्जी आपकी है|




Dinesh Paliwal said...

Jai Sadgurudev

Rozy Bahin ji,NPRU team, namashkar,

In todays all people must have to be do this sadhana because everyone wants that his fund is not go to less.

I will try to complete this sadhana if Sadgurudev and God grace me and my luck with me.

If anybody have not dikshit with Sadgurudev can he do this sadhana?
and if anybody who have not dikshit by any Sadguru can he do this sadhana?

Jai Sadgurudev

Prashant said...

Jay Gurudev Bhai,
Is sadhna me jo patra aapne bataya hai kya use pani se bharna hai?